ज्ञान मुद्रा करे तनाव को दूर

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    बुद्धि के विकास के लिए करें ज्ञान मुद्रा का प्रयोग | ज्ञान मुद्रा करे तनाव को दूर   वर्तमान समय में चित्त को शांत रखना और एकाग्रता बनाए रखना अपने आप में काफी बड़ा चुनोति पूर्ण कार्य है। तनाव वर्तमान की काफी बड़ी समस्या बन गयी है। ज्ञान मुद्रा के द्वारा हम तनाव को दूर रख सकते हैं। आज कल के शोर शराबे में चित्त को शांत रखने के लिए हम ज्ञान मुद्रा की सहायता ले सकते हैं। ज्ञान मुद्रा से हम अपनी आध्यात्मिक शक्ति एवं बुद्धि का विकास  कर सकते हैं। हमने कई चित्रों में देखा होगा की योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ज्ञान मुद्रा में बैठे

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जन्मदिवस है मित्र तुम्हारा आई है मंगल बेला

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  कविता जन्मदिवस है मित्र तुम्हारा  आई है मंगल बेला  आशीष मिले तुम्हे नारायण का  हो सब मंगल मंगल  सुख समृद्धि मिले तुम्हे अपार  हृदय ने यह बोला  सुखमय बीते जीवन तुम्हारा युहीं चले जीवन कि नांव   जन्मदिवस है मित्र तुम्हारा      आई है मंगल बेला ||1||    मातृभूमि दे आशीष तुम्हे   मिले सेवा का अवसर अपार  अर्जित करो जो सुख, समृद्धि तुम  आए वो देश सेवा के काम  धन्य बने जीवन तुम्हारा  करके सेवा अपार जन्मदिवस है मित्र तुम्हारा     आई है मंगल बेला ||2||    केवल शब्द नहीं यह मेरे  है उपहार तुम्हारे लिए  माना की कोई वस्तु नहीं  पर हृदय की गहराई से

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रामसेतु निर्माण के पूण्य कार्य में गिलहरी का योगदान

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  गिलहरी का पुण्य कार्य में योगदान रामसेतु बनाने का कार्य चल रहा था। भगवान राम को काफी देर तक एक ही दिशा में निहारते हुए देख लक्ष्मण जी ने पूछा भैया क्या देख रहें हैं आप इतनी देर से ? भगवान राम ने इशारा करते हुए दिखाया कि वो देखो लक्ष्मण एक गिलहरी बार – बार समुद्र के किनारे जाती है और रेत पर लोटपोट करके रेत को अपने शरीर पर चिपका लेती है। जब रेत उसके शरीर पर चिपक जाता है फिर वह सेतु पर जाकर अपना सारा रेत सेतु पर झाड़ आती है। वह काफी देर से यही कार्य

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  अमर शहीद लांस नायक हनुमनथप्पा जीवन परिचय पुण्यभूमि भारत जहां भगवान और देवता भी जन्म लेते हैं । ऐसी महान पुण्यभूमि भारत को भारतवासी अपनी माता मानते हैं और उसकी वंदना करते हैं। भारत वासियों के दिलों से जब भारत माता की जय और वन्देमातरम जैसे जयघोष निकलते हैं, तब सम्पूर्ण देश में सकरात्मक ऊर्जा और देश भक्ति की भावना का संचार होता है। भारत माता की रक्षा और सेवा के लिए हजारों वर्षों से माँ भारती के पुत्र स्वयं की इच्छा से हस्ते – हस्ते अपने प्राणों का बलिदान देते आए हैं। ऐसे ही एक माँ भारती के वीर

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पढ़ाई देर रात तक करें या फिर सुबह जल्दी उठकर ?

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    पढ़ाई देर रात तक करें या फिर सुबह जल्दी उठकर ? वर्तमान परिस्थितियों और जीवन संघर्ष में उच्च शिक्षा का महत्व काफी बड़ गया है ।  अधिकतर विधार्थी अच्छे अंकों से उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। अच्छे अंकों के लिए पूर्ण लगन से पढ़ाई करनी पड़ती है परन्तु अनेकों विधार्थीयों ने एक उपाय ढूंढ लिया है कि अच्छे अंकों के लिए देर रात तक पढ़ाई करो । पढ़ाई करना अच्छी बात है परन्तु ऐसी पढ़ाई किस काम की जो हमारे स्वास्थ्य को हानि पहुंचाए। आजकल कई विधार्थी देर रात 2:30 – 3:00  बजे तक पढ़ाई करते हैं, इससे उन्हें

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श्री गुरुजी जीवन प्रेरक प्रसंग : चन्दन है इस देश की माटी

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  एक नवयुवक का प्रतिदिन प्रातः व्यायामशाला में जाने का नियम था। एक दिन किसी कारणवश वह व्यायाम करने न जा सका। नियम न टूटे इस बात को ध्यान में रखते हुए वह कॉलेज जाते समय व्यायामशाला में गया और उसकी माटी को मस्तक पर लगाकर सीधे कॉलेज चला गया। पश्चिमी सभ्यता के रंग में रंगे हुए छात्र उसके मस्तक पर लगे माटी के टीके को देखकर हैरान हो गए।  एक ने व्यंग्य के स्वर में पूछा – तुमने कौन सा सौन्दर्य प्रसाधन ( cosmetic ) अपने मस्तक पर लगा रखा है। इसे सुनकर पास खड़े और छात्र भी हंसने लगे। उस

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    कविता नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा   वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।      जन्म लिया लायलपुर में  खेती की बन्दुक की  यातनाएं सहीं अनेको बार लेटा बरफ पर अंग्रेजों ने मारे कोड़े कई हज़ार  जख्मो पर रगडे नमक मिर्च कई-कई बार पर भारत माँ के लाल के मुख से आह न निकली  निकली आवाज जब भी निकली  तो भारत माँ के गान की निकली नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा               वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।1।।    फेंक बम्ब असेम्ब्ली हिलादी बेहरी सरकार  कांप उठे सब अंग्रेजी हुक्मरान  सुन इन्कलाब जिन्दाबाद

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Sanskrit shlok in hindi and english about elders respect

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    अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन: ।  चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम् ।।   हिंदी में अर्थ :- जो अपने बड़ों को सदैव नमस्कार करता है, किसी प्रकार से उनका अभिवादन करता है और जो वृद्धों की नित्य सेवा किया करता है, उसकी चार चीजें बढ़ती हैं – आयु, विद्या, कीर्ति और शक्ति ।    In English :-  One who daily respect and serve the elders. Who greets elders by any way, his four things increases – life, knowledge, fame and power.  

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hindu culture food eating tips for better health in hindi

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  स्वस्थ शरीर एवं मन के लिए भोजन सम्बंधित अति महत्वपूर्ण बातें स्वस्थ शरीर और मन के लिए भोजन का काफी बड़ा महत्व है। भोजन हमारे शरीर की ऊर्जा का स्त्रोत है। यदि किसी समय भोजन न किया जाय तो ऐसा आभास होता है, कि जैसे शरीर में प्राण ही न हो। परंतु उचित एवं संतुलित भोजन हमारे शरीर को अच्छी ऊर्जा प्रदान करता है। भोजन करना सबको अच्छा लगता है, परंतु यदि भोजन से सम्बंधित नियमों एवं कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान न रखा जाए तो यही भोजन शरीर में अनेकों रोगों को जन्म दे देता है। भोजन सम्बंधित अति

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Arjun ki krishan bhakti

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  महाभारत के युद्ध के बाद एक बार भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन द्वारिका गये, इस बार रथ अर्जुन चला के ले गाये। द्वारिका पहुँच कर अर्जुन जी को काफी थकावट हो गयी, तो वह विश्राम करने के लिए अतिथि गृह में चले गये। संध्या के समय देवी रुक्मणी जी ने भगवान श्री कृष्ण को भोग अर्पित किया, तो भगवान बोले कि घर में अतिथि आये हुए हैं। मैँ अर्जुन के साथ ही भोजन करूँगा, रुक्मणी जी ने कहा प्रभु आप भोजन प्रारम्भ कीजिए में अर्जुन जी को बुलाके लाती हूँ। देवी रुक्मणी जैसी ही अतिथि गृह में पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि अर्जुन

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