ज्ञान मुद्रा करे तनाव को दूर

 

 

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बुद्धि के विकास के लिए करें ज्ञान मुद्रा का प्रयोग | ज्ञान मुद्रा करे तनाव को दूर

 

वर्तमान समय में चित्त को शांत रखना और एकाग्रता बनाए रखना अपने आप में काफी बड़ा चुनोति पूर्ण कार्य है। तनाव वर्तमान की काफी बड़ी समस्या बन गयी है। ज्ञान मुद्रा के द्वारा हम तनाव को दूर रख सकते हैं। आज कल के शोर शराबे में चित्त को शांत रखने के लिए हम ज्ञान मुद्रा की सहायता ले सकते हैं। ज्ञान मुद्रा से हम अपनी आध्यात्मिक शक्ति एवं बुद्धि का विकास  कर सकते हैं। हमने कई चित्रों में देखा होगा की योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ज्ञान मुद्रा में बैठे हैं । भगवान शिव भी ज्ञान मुद्रा में बैठे होते हैं तथा गुरु नानक देव जी आदि अनेकों भगवानों एवं गुरुओं के दर्शन हम ज्ञान मुद्रा में करते हैं।

 

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हस्त अंगुलियों का ज्ञान :-  कोई भी मुद्रा करने से पहले हमें यह जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि हाथ की कौन सी अंगुली किस तत्व की प्रतिक है।

1.  अंगूठा ( Thumb )( अंगुष्ठ ) :- हमारे हाथ का अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतिक होता है और इसका सम्बन्ध मणिपुर चक्र से भी होता है।

2. तर्जनी ( Index Finger ) :-  तर्जनी अंगुली वायु तत्व की प्रतिक होती है और इसका सम्बन्ध अनाहत चक्र से भी होता है ।

3.  मध्यमा ( Middle Finger ) :- मध्यमा अंगुली आकाश तत्व की प्रतिक होती है और इसका सम्बन्ध विशुद्धि चक्र से भी होता है।

4.  अनामिका ( Ring Finger ) :- अनामिका अंगुली पृथ्वी तत्व की प्रतिक होती है और इसका सम्बन्ध मूलाधार चक्र से होता है ।

5. कनिष्ठा ( Little Finger ) :- कनिष्ठा अंगुली जल तत्व की प्रतिक होती है और इसका सम्बन्ध स्वाधिष्ठान चक्र से होता है ।




ज्ञान मुद्रा की विधि :-

1. सबसे पहले स्वच्छ स्थान पर कोई आसन या चटाई आदि बिछा लें ।

2. अब सुखासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठ जाएं और कमर सीधी रखें।

3. यदि किसी की पीठ या घुटनों में दर्द है, तो आराम से कुर्सी पर बैठ जाएं ।

4. अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर रखें और हाथों की हथेलियां ऊपर आकाश की तरफ होनी चाहिए ।

5. तर्जनी अंगुली ( Index Finger ) के अग्र भाग और अंगूठे ( Thumb ) के अग्र भाग को आपस में मिलाएं और बाकि की तीनों अंगुलियां सीधी रखें ।

6. यह ज्ञान मुद्रा हमें दोनों हाथों से बनानी है।

7. इस मुद्रा को यदि हम चाहें तो चलते, फिरते , सोते, जागते, उठते, बैठते भी बना सकते हैं।

8. अधिक लाभ हेतु हमें ज्ञान मुद्रा में आंखें बंद कर सामान्य श्वास क्रिया के साथ ॐ का उच्चारण करना  चाहिए।

9.  ज्ञान मुद्रा में हमें 30 से 45 मिनट तक बैठना चाहिए। यदि इतनी देर नहीं बैठ पाएं, तो हम इस क्रिया को 10 से 15 मिनट 3 बारी में कर सकते हैं।

10. ज्ञान मुद्रा में हम दिन में कभी भी बैठ सकते हैं परंतु सुबह का समय इसके लिए काफी उत्तम है।




ज्ञान मुद्रा के लाभ :-

1 . हमारा अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतिक होता है और तर्जनी अंगुली वायु तत्व की प्रतिक है। ज्योतिष के अनुसार अंगूठा मंगल गृह का भी प्रतिक है और तर्जनी अंगुली बृहस्पति का है। दोनों तत्वों के मिलने से वायु तत्व में वृद्धि होती है जिससे बृहस्पति का प्रभाव बढ़ता है। अतः इस कारण से नकरात्मक विचार दूर होते हैं। बुद्धि का विकास होता है। एकाग्रता बढ़ती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और मानसिक शक्ति का विकास होता है।

2. मन को शांति प्राप्त होती है ।

3. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ( Immunity ) बढती है।

4. ज्ञान मुद्रा ध्यान ( Meditation ) करने के लिए सबसे उपयोगी मुद्रा है।

5. ज्ञान मुद्रा के नियमित अभ्यास से मनुष्य क्रोध, तनाव, भय, शोक, इर्ष्या इत्यादि से छुटकारा पा सकता है।

6. ज्ञान मुद्रा के नियमित अभ्यास से तनाव ( Tension ) के कारण होने वाले सभी रोग जैसे उच्च रक्तचाप ( High Blood Pressure), हृदय रोग ( Heart Disease) , सिरदर्द ( Headache), माइग्रेन , अनिद्रा ( Insomnia ), मधुमेह ( Diabetes ) इत्यादि में लाभ प्राप्त होता है।

7. मानसिक अवसाद ( Depression ) मिर्गी आदि मानसिक रोगों में भी ज्ञान मुद्रा से काफी लाभ मिलता है।

8. यदि कभी मानसिक उत्तेजना ( mental stimulation ) के कारन नींद ना आ रही हो तो ज्ञान मुद्रा को करने से नींद आ जाती है। जिन्हें ज्यादा नींद आती है उनकी नींद संतुलित होती है।

9. ज्ञान मुद्रा में बैठ आंखें बंदकर ईश्वर का ध्यान करने से परम आनंद महसूस होता है । आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रगति के लिए यह मुद्रा अत्यंत लाभदायक है।

10. ज्ञान मुद्रा के नियमित अभ्यास से नशे की लत से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

11. सकरात्मक लक्ष्य की तरफ ध्यान केंद्रित करने के लिए ज्ञान मुद्रा काफी लाभदायक सिद्ध होती है।

12.  कई वर्षों तक पूर्ण एकाग्रता द्वारा ज्ञान मुद्रा में ध्यान लगाने से मनुष्य की इन्द्रियाँ जागृत हो जाती हैं। जिससे उन्हें कई घटनाओं का पूर्वानुमान होने लग जाता है और दूसरों के मन की बात जानने की क्षमता बढ़ती है ।

सावधानी :- भोजन करने एवं चाय, कॉफी इत्यादि पीने के तुरंत बाद कोई भी मुद्रा नहीं करनी चाहिए । मुद्रा करते समय यदि किसी प्रकार की असहजता ( Discomfort ), या किसी प्रकार का कष्ट का अनुभव हो तो उस समय मुद्रा छोड़ देनी चाहिए।

निवेदन :- यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो और अगर आपको यह लगता है कि इसे पड़कर किसी को स्वास्थ्य लाभ हो सकता है। तो कृपया इस लेख को Like और Share करें । धन्यवाद




 

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