जन्मदिवस है मित्र तुम्हारा आई है मंगल बेला

  कविता जन्मदिवस है मित्र तुम्हारा  आई है मंगल बेला  आशीष मिले तुम्हे नारायण का  हो सब मंगल मंगल  सुख समृद्धि मिले तुम्हे अपार  हृदय ने यह बोला  सुखमय बीते जीवन तुम्हारा युहीं चले जीवन कि नांव   जन्मदिवस है मित्र तुम्हारा      आई है मंगल बेला ||1||    मातृभूमि दे आशीष तुम्हे   मिले सेवा का अवसर अपार  अर्जित करो जो सुख, समृद्धि तुम  आए वो देश सेवा के काम  धन्य बने जीवन तुम्हारा  करके सेवा अपार जन्मदिवस है मित्र तुम्हारा     आई है मंगल बेला ||2||    केवल शब्द नहीं यह मेरे  है उपहार तुम्हारे लिए  माना की कोई वस्तु नहीं  पर हृदय की गहराई से

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shaheed bhagat singh poem in hindi

shaheed bhagat singh poem in hindi

  shaheed bhagat singh poem in hindi कविता वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना   नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा   वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।      जन्म लिया लायलपुर में  खेती की बन्दुक की  यातनाएं सहीं अनेको बार लेटा बरफ पर अंग्रेजों ने मारे कोड़े कई हज़ार  जख्मो पर रगडे नमक मिर्च कई-कई बार पर भारत माँ के लाल के मुख से आह न निकली  निकली आवाज जब भी निकली  तो भारत माँ के गान की निकली नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा               वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।1।।    फेंक बम्ब

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रक्तदान है महादान नही कोई आम दान

blood donation poem in hindi

Blood donation poem in hindi कविता रक्तदान है महादान नही कोई आम दान रक्तदान है महादान।।   मिलता इससे नर को नव जीवन दान मिलती उसके स्वप्नो को नव उमंग देखे थे स्वप्न नर ने मातृभूमि की सेवा के परन्तु दुर्घटनावश अधर में अटके हैं उसके प्राण रक्त ने दिया उसे नव जीवन दान रक्तदान है महादान नहीं कोई आम दान  रक्तदान है महादान ||1|| पूज्य स्वामी विवेकानन्द ने कहा नर को तुम नारायण समझो  नर सेवा का व्रत लो महान  मातृभूमि की सेवा में मातृभूमि की सेवा में अर्पित कर दो तन मन धन मन में लो यह शपत महान कि खून की कमी

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