hindu culture food eating tips for better health in hindi

 

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स्वस्थ शरीर एवं मन के लिए भोजन सम्बंधित अति महत्वपूर्ण बातें

स्वस्थ शरीर और मन के लिए भोजन का काफी बड़ा महत्व है। भोजन हमारे शरीर की ऊर्जा का स्त्रोत है। यदि किसी समय भोजन न किया जाय तो ऐसा आभास होता है, कि जैसे शरीर में प्राण ही न हो। परंतु उचित एवं संतुलित भोजन हमारे शरीर को अच्छी ऊर्जा प्रदान करता है। भोजन करना सबको अच्छा लगता है, परंतु यदि भोजन से सम्बंधित नियमों एवं कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान न रखा जाए तो यही भोजन शरीर में अनेकों रोगों को जन्म दे देता है।

भोजन सम्बंधित अति आवश्यक बातें :-

1.  भोजन हमेशा स्नान करने के पश्चात् ही खाना चाहिए :-  स्नान करने से अच्छी भूक जागृत होती है क्योंकि स्नान करने से पुरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। स्नान करने के पश्चात् व्यक्ति अनमने भाव को त्याग कर रुचिपूर्वक भोजन ग्रहण करता है। वर्तमान जीवन शैली में बैड टी अनेकों लोगों की आदत बन गयी है। जिस कारन व्यक्ति अनेकों रोगों से ग्रसित हो रहे हैं। रात भर हमारे मुंह में अनेकों कीटाणु एकत्र हो जाते हैं, जोकि चाय आदि के साथ हमारे शरीर में जाकर हमारी पाचन क्रिया को खराब कर देते हैं। इसलिए इन बुरी आदतों से बचने के लिए हमें स्नान के पश्चात् ही भोजन करना चाहिए ।

2. भोजन करने से पूर्व हाथ, मुह और पैर अच्छे से शुद्ध जल से धोने चाहिए। पैरों को धोने के बाद भोजन करने से आयु में वृद्धि होती है।

3. भोजन करने से पहले हमें लघु एवं दीर्घशंका का निवारण कर लेना चाहिए ( free from urine and toilet etc.)  जिस कारण आपको भोजन के बिच में उठना न पड़े।

4. हमेशा अपने नाखून काट के रखने चाहिए। नाखूनों में फसी मैल में कीटाणु होते हैं, जोकि भोजन के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर हमें अस्वस्थ बना सकते हैं।

5. प्रातः एवं सायं में ही भोजन करने का विधान दिया गया है। हमें प्रयास करना चाहिए की हम प्रातः और सायं में भोजन करलें क्योंकि सूर्योदय के 2 घंटे बाद और सूर्यास्त से 2:30 घंटे पूर्व जठरग्नि काफी प्रबल होती है। भोजन का समय निश्चित करें और प्रयास करें की नियमित समय से ही रोजाना भोजन करें। दिनभर का भोजन एक ही बार न खाएं, थोड़ी – थोड़ी मात्रा में 2 या 3 बार भोजन करें। एकबार भोजन करने के पश्चात् प्रयास करें की अगला भोजन कम से कम तीन घंटे बाद हो।

6. प्रयास करें कि पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुँह करके ही खाना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके किया गया भोजन प्रेत को प्राप्त होता है। पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके भोजन करने से रोगों में वृद्धि होती है।

7. पलंग या चारपाई इत्यादि पर भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन हमेशा स्वच्छ, हवादार एवं प्रकाशयुक्त स्थान पर आसन बिछा कर करना चाहिए।

8. टूटे- फूटे बर्तनों में भोजन नहीं करना चाहिए।

9. चिंता, तनाव, क्रोध, जल्दबाजी में कभी भोजन न करें । भोजन हमेशा शांत और तनावरहित स्थिति में ही करें।

10. मासाहार तथा तमोगुण युक्त भोजन नहीं करना चाहिए। अधिक तला हुआ या ज्यादा मसालेदार भोजन नहीं करना चाहिए। बासा भोजन नहीं करना चाहिए। पचने में भरी भोजन जैसेकि बर्गर, पिज्जा जैसे फास्ट फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए।

11.  शाकाहारी एवं सात्विक भोजन ग्रहण करें। दूध, मक्खन, गाय का घी, दहीं, छाछ, गेहूं, चावल, सब्जी, फल एवं इनसे बनें सात्विक भोजन का सेवन करें।

12. भोजन बनाने वाला स्नान करके शुद्ध मन से भोजन बनाये। भोजन बनाते वक्त भगवान् के नाम का जप करना चाहिए और प्रसन्न चित्त से भोजन परोसना चाहिए।

13. भोजन करने से पूर्व भोजन ईश्वर को अर्पित करें। हमें ईश्वर नें इतना अच्छा भोजन दिया इसके लिए ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए। ईश्वर का नाम जप करना चाहिए और ईश्वर से प्राथना करनी चाहिए की सभी को भोजन प्राप्त हो और कोई भी भूखा ना रहे। भोजन हमेशा ईश्वर का प्रसाद समझकर ग्रहण करना चाहिए।

14. भोजन करते समय स्वाद के चक्कर में एक ही बारी में बहुत अधित भोजन नहीं करना चाहिए। पेट में एक भाग जल एवं एक भाग वायु के लिए छोड़ देना चाहिए।

15. यथासंभव हो सके तो परिवार के सभी सदस्य एक साथ भोजन करें। इससे परिवार में आत्मीयता बढ़ती है।

16. भोजन करते समय बीच में उठकर नहीं जाना चाहिए ।

17.  भोजन करते वक्त शांत रहना चाहिए और पूरा ध्यान भोजन पर केंद्रित रहे।

18.  भोजन भली प्रकार से चबाकर धीरे – धीरे खाना चाहिए ।

19.  मक्कार और दुष्ट लोगों के साथ भोजन नहीं कर चाहिए ।

20.  प्रयास करें की भोजन करने से पहले भोजन थाली में से पंचग्रास निकाल  लें। पंचग्रास में भोजन थाली में जो भोजन है उन सबका थोड़ा – थोड़ा हिस्सा लेकर ऐसे पांच कौर निकालने  चाहिए। यह पंचग्रास ऋषि, देवता, पितर, मनुष्य और पशु पक्षियों के लिए निकाले जाते हैं।

21.  सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन और अंत में कड़वा भोजन करना चाहिए।

22.  सबसे पहले रसदार, बीच में गरिष्ठ तथा अंत में द्रव्य पदार्थ ग्रहण करना चाहिए।

23. केले का पत्ता पवित्र एवं सात्विक होता है। केले के पत्ते पर भोजन करने से आरोग्य प्राप्त होता है और पेट के विकार नहीं होते।

24. भोजन के साथ फलों के रस एवं जल का सेवन नहीं करना चाहिए :-  भोजन में स्वाभाविक रूप से थोड़ा बहुत जल तो होता ही है, इसलिए भोजन के साथ जल का सेवन जरुरी नहीं है। भोजन करने से पूर्व थोड़ा पानी पी लेना चाहिए। इससे गला तर रहता है। यदि भोजन के बिच में जल की आवश्यकता हो तो थोड़ा सा गर्म पानी पिया जा सकता है, परंतु शीतल जल नहीं पीना चाहिए और भोजन के तुरन्त बाद तो जल बिलकुल भी नहीं पीना चाहिए। भोजन ग्रहण करने के एक से डेड घंटे के पश्चात् ही जल ग्रहण करना चाहिए। भोजन करने के तुरंत बाद हमारी जठराग्नि काफी तीव्र होती है, जोकि हमारे भोजन को पचाने में काफी सहायक होती है। भोजन करने के तुरंत बाद पानी पिने से जठराग्नि शांत हो जाती है जिससे भोजन को पचाने में काफी अधिक समय लग जाता है और कई बार भोजन सही से पच भी नहीं पाता। जिस कारन गैस , पेट में दर्द आदि की शिकायत रहने लगती है। फलों का रास शीघ्र पच जाता है, परंतु भोजन पचने में अधिक समय लगता है। इसलिए भोजन के साथ में जल और फलों के रस का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि अधिक मन कर रहा हो कर रहा हो तो हम भोजन से एक घंटा पूर्व या एक घंटा पश्चात् फलों के रस का सेवन कर सकते हैं। भोजन के साथ लिम्का, कोक एवं पेप्सी इत्यादि लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। भोजन के साथ में लस्सी एवं छाछ आदि का सेवन किया जा सकता है।

समय पर भोजन न करने से होनेवाली हानियाँ । Disadvantages of not eating on time   

1. समय पर भोजन न करने से शारीरिक एवं मानसिक हानि पहुंचती है।

2.  भोजन हमारी ऊर्जा का सबसे बड़ा स्त्रोत है, समय पर भोजन न करने से स्वास्थ्य खराब होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। समय से भोजन न करने पर पेट के रोग बढ़ जाते हैं जैसेकि गैस आदि।

3. समय पर भोजन न करने से हमारा अधिकतर ध्यान भोजन करने या पानी पिने इत्यादि पर लगा रहता है। इससे हमारी शक्ति अनावश्यक  खर्च होती है और भूक के मारे सर में दर्द आदि की  शिकायत रहने लगती है।

4. समय पर भोजन न करने से हमारी मासपेशियों पर असर पड़ता है और हमें कमजोरी महसूस होने लगती है।

5. समय पर भोजन न करने से हमारी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है और हमारी कार्यक्षमता घट जाती है।

6. समय पर भोजन न करने से हमारी नींद भी प्रभावित होती है और कभी- कभी सोते समय बैचेनी महसूस होती है।

7. समय पर भोजन न करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आती है।

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