Motivational story of Swami Ramtirth in Hindi

 

बोध कथा

Motivational story of Swami Ramtirth in Hindi

Motivational story of Swami Ramtirth in Hindi
चुनोती और दृढ़ निश्चय : स्वामी रामतीर्थ बोध कथा

एक बार की बात है, जब स्वामी रामतीर्थ जी सन्यास लेने से बहुत पहले एम. ए में पढ़ते थे । उस समय उनका नाम तीर्थराम था । गणित उनका प्रिय विषय था। उनकी एक आदत थी कि यदि प्रश्न-पत्र में लिखा होता कि किन्ही पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, तो भी वह सभी प्रश्न हल कर देते थे । वह नहीं चाहते थे की कोई प्रश्न उनसे हल न हो । एक बार दूसरे दिन गणित की परीक्षा थी । परीक्षा से एक दिन पहले सायं में वह प्रश्नों को हल करने में जुटे थे । काफी रात हो गई किन्तु एक प्रश्न हल नहीं हो रहा था । फिर भी तीर्थराम बड़ी लगन से उस प्रश्न को हल करने में जुटे रहे ।




उनको एक प्रश्न के लिए इतना व्यग्र देख उनके एक साथी ने कहा – ” तीर्थराम, क्या केवल यही प्रश्न परीक्षा में आएगा क्या ? इसे छोड़कर किसी दूसरे प्रश्न पर ध्यान क्यों नहीं देते ? ” तीर्थराम ने उत्तर दिया – ” समस्या इस प्रश्न के परीक्षा में आने की नहीं है अपितु बात यह है कि इस प्रश्न ने मुझे चुनोती दी है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि में इस प्रश्न को हल कर लूंगा ।” प्रश्न बड़ा ही जटिल था, हल हो ही नहीं रहा था। प्रयास करते – करते सवेरा हो गया। अब परीक्षा आरम्भ होने में केवल दो घंटे शेष रह गए थे।




तीर्थराम नहीं चाहते थे कि उन्हें परीक्षा में कोई प्रश्न छोड़ के आना पड़े। अचानक ही वे उठे, घडी में अलार्म लगाया और फिर उस प्रश्न को हल करने के लिए बैठ गए । मित्र के समझाने पर भी वह प्रश्न को हल किए बिना परीक्षा देने जाने को तैयार नहीं थे । उनके मित्र ने सोचा तीर्थराम पागल हो गया है । तीर्थराम का मित्र चिंता में पड़ गया । अभी पाँच मिनट भी नहीं हुए थे कि प्रश्न हल हो गया । मित्र ने तीर्थराम से कहा कि यह तो प्रश्न हल करने का बहुत ही अच्छा उपाय है। यदि प्रश्न हल नहीं होता तो क्या तुम परीक्षा देने नहीं जाते क्या ? रामतीर्थ ने उत्तर दिया, ”  मैं किसी को धोखा देने वाला नहीं था । जो बात मुझे चुनोती देती है, मैं उसे स्वीकार करता हूँ । यदि में उसका उत्तर देने में समर्थ नहीं तो मेरे जीवन का क्या लाभ ? ” मित्र उनके विश्वास और लगन को देखकर बहुत ही प्रसन्न हुआ । यदि किसी कार्य को पूर्ण विश्वास और लगन से किया जाये, तो गणित तो क्या जीवन की मुश्किल से मुश्किल समस्या को हल किया जा सकता है।

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