Netaji subhash chandra bose inspirational story in hindi | निर्भीकता

 

netaji subhash chandra bose inspirational story in hindi

Netaji subhash chandra bose inspirational story in hindi
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की निर्भीकता

एक बार नेताजी सुभाषचन्द्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) जर्मनी में हिटलर (Adolf Hitler) से बातचीत कर रहे थे। नेताजी भारत को आजाद करवाने के लिए वे दुनिया भर की मदद चाहते थे। सुभाष बाबू को हिटलर यह प्रस्ताव अच्छा नहीं लगा कि अपने प्रिय देश भारत पर बमबारी की जाये या एक इंच भूमि भी किसी को दी जाये। परिणामस्वरूप उन्होंने हिटलर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और चलने के लिए खड़े हो गए, हिटलर ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा की हिटलर को ना पसंद नहीं  है। तुम हिटलर के सामने खड़े हो, तुम्हें लगता है कि तुम मुझे इन्कार करके यहाँ से जीवित जा सकते हो।

 

नेताजी ने निर्भीकता से उत्तर दिया की दुनिया की कोई जेल सुभाष को बन्दी बना सकती। अंग्रेजों की आँखों में धूल झोंककर भारतीय सीमाओं को पार करने वाले को तुम बन्दी नहीं बना सकते। नेताजी की निर्भीकता और तेज का हिटलर पर ऐसा जादू हुआ कि उसने सम्मान सहित नेताजी को अपने देश की सीमा से विदा किया। 

 

निर्भयता वह प्रकाश है जो मन के अंधियारे को आलोकित कर देता है। निर्भीक व्यक्ति मार्ग की किसी भी बाधा से विचलित नहीं होता।      

 

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