hindu culture food eating tips for better health in hindi

  स्वस्थ शरीर एवं मन के लिए भोजन सम्बंधित अति महत्वपूर्ण बातें स्वस्थ शरीर और मन के लिए भोजन का काफी बड़ा महत्व है। भोजन हमारे शरीर की ऊर्जा का स्त्रोत है। यदि किसी समय भोजन न किया जाय तो ऐसा आभास होता है, कि जैसे शरीर में प्राण ही न हो। परंतु उचित एवं संतुलित भोजन हमारे शरीर को अच्छी ऊर्जा प्रदान करता है। भोजन करना सबको अच्छा लगता है, परंतु यदि भोजन से सम्बंधित नियमों एवं कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान न रखा जाए तो यही भोजन शरीर में अनेकों रोगों को जन्म दे देता है। भोजन सम्बंधित अति

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Arjun ki krishan bhakti

  महाभारत के युद्ध के बाद एक बार भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन द्वारिका गये, इस बार रथ अर्जुन चला के ले गाये। द्वारिका पहुँच कर अर्जुन जी को काफी थकावट हो गयी, तो वह विश्राम करने के लिए अतिथि गृह में चले गये। संध्या के समय देवी रुक्मणी जी ने भगवान श्री कृष्ण को भोग अर्पित किया, तो भगवान बोले कि घर में अतिथि आये हुए हैं। मैँ अर्जुन के साथ ही भोजन करूँगा, रुक्मणी जी ने कहा प्रभु आप भोजन प्रारम्भ कीजिए में अर्जुन जी को बुलाके लाती हूँ। देवी रुक्मणी जैसी ही अतिथि गृह में पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि अर्जुन

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एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जीवन परिचय

  एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जीवन परिचय भारत भू की मिटटी इतनी महान है कि इसने अपनी गोद में ऐसे महान महापुरुषों को जन्म दिया है कि  जिन्होंने अनेक प्रकार की विपदाओं का सामना करते हुए भी मातृ भूमि की सेवा की है और भारतवासियों का मार्ग दर्शन किया है । इसी भारत की मिटटी पर एक भारत माता के पुत्र हुए हैं पंडित दीनदयायल उपाध्याय जी। पंडित दीनदयायल उपाध्याय जी का जन्म 25, सितम्बर, 1916 को मथुरा जिले के एक छोटे दे गाँव नंगला चन्द्रभान में हुआ था। पंडित दीनदयाल जी की माता रामप्यारी जी एक धार्मिक प्रवृत्ति की महिला

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धोकेबाज बेटे की बेसहारा विधवा माँ

मित्रों कुछ दिन पूर्व में कुछ सम्माननीय व्यक्तियों से बातचीत कर रहा था। बातचीत करते – करते एक घटना के बारे में मुझे पता लगा, तो मुझे लगा की इस विषय पर अवश्य लिखना चाहिए। इसलिए में वो घटना एक लेख के माध्यम से आप सब के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ। एक सम्पन्न परिवार(Rich Family) में एक बालक का जन्म हुआ। माता पिता ने उसे बचपन से ही काफी लाड़ प्यार से पाला। उसे अंग्रेजी शिक्षा दिलाई और बड़ा होकर वह उच्च शिक्षा प्राप्त करके अमरीका चला गया। माता पिता कुछ वर्ष झुटे गर्व में जीते रहे की हमारा बेटा अमरीका में रह

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Netaji subhash chandra bose inspirational story in hindi | निर्भीकता

netaji subhash chandra bose inspirational story in hindi

  Netaji subhash chandra bose inspirational story in hindi नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की निर्भीकता एक बार नेताजी सुभाषचन्द्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) जर्मनी में हिटलर (Adolf Hitler) से बातचीत कर रहे थे। नेताजी भारत को आजाद करवाने के लिए वे दुनिया भर की मदद चाहते थे। सुभाष बाबू को हिटलर यह प्रस्ताव अच्छा नहीं लगा कि अपने प्रिय देश भारत पर बमबारी की जाये या एक इंच भूमि भी किसी को दी जाये। परिणामस्वरूप उन्होंने हिटलर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और चलने के लिए खड़े हो गए, हिटलर ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा की हिटलर को ना पसंद नहीं  है। तुम हिटलर के सामने खड़े हो, तुम्हें लगता है कि तुम मुझे इन्कार करके यहाँ

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रक्तदान है महादान नही कोई आम दान

blood donation poem in hindi

Blood donation poem in hindi कविता रक्तदान है महादान नही कोई आम दान रक्तदान है महादान।।   मिलता इससे नर को नव जीवन दान मिलती उसके स्वप्नो को नव उमंग देखे थे स्वप्न नर ने मातृभूमि की सेवा के परन्तु दुर्घटनावश अधर में अटके हैं उसके प्राण रक्त ने दिया उसे नव जीवन दान रक्तदान है महादान नहीं कोई आम दान  रक्तदान है महादान ||1|| पूज्य स्वामी विवेकानन्द ने कहा नर को तुम नारायण समझो  नर सेवा का व्रत लो महान  मातृभूमि की सेवा में मातृभूमि की सेवा में अर्पित कर दो तन मन धन मन में लो यह शपत महान कि खून की कमी

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