shaheed bhagat singh poem in hindi

 

shaheed bhagat singh poem in hindi

shaheed bhagat singh poem in hindi

कविता

वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना

 

नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा

  वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।  

   जन्म लिया लायलपुर में

 खेती की बन्दुक की 

यातनाएं सहीं अनेको बार

लेटा बरफ पर अंग्रेजों ने मारे कोड़े कई हज़ार 

जख्मो पर रगडे नमक मिर्च कई-कई बार

पर भारत माँ के लाल के मुख से आह न निकली

 निकली आवाज जब भी निकली

 तो भारत माँ के गान की निकली

नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा

              वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।1।।   




फेंक बम्ब असेम्ब्ली हिलादी बेहरी सरकार 

कांप उठे सब अंग्रेजी हुक्मरान 

सुन इन्कलाब जिन्दाबाद बारम्बार 

खडे हो गए उन सबके कान 

नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा

              वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।2।।    

विरोध किया साइमन का 

बदला लिया लाला जी की शहादत का 

ठोंक सांडर्स के सीने में गोली दो चार 

हिलादिया पूरा अंग्रेजी तख्तोताज 

थर-थर कांपे अंग्रेज सिपाही 

    सुन धायें-धायें की आवाज  

नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा

              वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।3।।  




कर भूखड़ताल जीते भारतीयों के दिल 

झुका दिये सब अंग्रेजी सिर 

हस्ते-हस्ते भारत माँ के लाल ने फांसी की रस्सी गले लगाली 

और भारत माँ की बेड़ियां तोड़ डालीं 

नव जवानी जिसे मिला फांसी का फन्दा

              वो शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह अपना।।4।।

लेखक :- भारत माता के आशीर्वाद से 

           अंकित चमन भंडारी




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