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अमर शहीद लांस नायक हनुमनथप्पा जीवन परिचय

पुण्यभूमि भारत जहां भगवान और देवता भी जन्म लेते हैं । ऐसी महान पुण्यभूमि भारत को भारतवासी अपनी माता मानते हैं और उसकी वंदना करते हैं। भारत वासियों के दिलों से जब भारत माता की जय और वन्देमातरम जैसे जयघोष निकलते हैं, तब सम्पूर्ण देश में सकरात्मक ऊर्जा और देश भक्ति की भावना का संचार होता है। भारत माता की रक्षा और सेवा के लिए हजारों वर्षों से माँ भारती के पुत्र स्वयं की इच्छा से हस्ते – हस्ते अपने प्राणों का बलिदान देते आए हैं। ऐसे ही एक माँ भारती के वीर पुत्र ने 11 फरवरी 2016, प्रातः 11:45 पर अपने प्राणों की आहुति दे दी। माँ भारती के उस वीर पुत्र का नाम है शहीद लाँस नायक हनुमनथप्पा।

अमर शहीद हनुमनथप्पा जी का जन्म 1 जून 1983 को कर्नाटक के धारवाड़ जिले के बेतादुर गाँव के एक गरीब परिवार में हुआ था। शहीद हनुमनथप्पा जी चार भाई – बहनों में सबसे छोटे थे। वह अपने घर से 6 किलोमीटर दूर पैदल अपने विद्यालय जाया करते थे। बचपन से ही शहीद हनुमनथप्पा जी के अन्दर देश के लिए जीने मरने का जूनून था। उनका सपना था कि वह भारतीय फौज में भर्ती होकर भारत माता की सेवा करें। शहीद हनुमनथप्पा जी ने इसके लिए काफी मेहनत करी। भारतीय सेना में भर्ती के उनको तीन बार अस्वीकार किया गया, परन्तु वीर हनुमनथप्पा जी ने हार न मानी और चौथी बार वह 25 अक्तूबर 2002 में मद्रास रेजिमेंट की 19वीं बटालियन के जवान बन गए।




वीर शहीद हनुमनथप्पा जी अपनी 13 वर्ष की सेवा में से 10 वर्ष चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तैनात रहे। इन क्षेत्रों में हर वक्त मौत का खतरा बना रहता था। शहीद हनुमनथप्पा जी ने हमेशा अपनी तैनाती के लिए आसान जगहों की अपेक्षा कठिन स्थानों को चुना। शहीद हनुमनथप्पा जी 2003 से 2006 तक जम्मू – कश्मीर के माहोर में तैनात रहे। इस दौरान चले आतंकवाद विरोधी अभियान में उनकी सक्रीय भूमिका की भारतीय सेना ने भी भली भांति पहचाना। वर्ष 2008 – 2010 के दौरान शहीद हनुमनथप्पा जी ने अपनी इच्छा से 54 राष्ट्रीय राइफल्स में जम्मू-कश्मीर में अपनी पोस्टिंग ली। वर्ष 2010 -2012 के बीच पूर्वोत्तर राज्यों में पोस्टिंग ली। जहां उन्होंने उग्रवादी संगठन NDFB ( National Democratic Front of Bodoland ) और ULFA ( United Liberation Front of Assam) के खिलाफ सेना के सफल अभियानों में सक्रियता से भाग लिया। अगस्त 2015 में उनकी पॉस्टिंग सियाचिन में हुई। दिसम्बर 2015 में उन्होंने सियाचिन की 1960 फीट की ऊंचाई पर सबसे ऊँची चौकियों में से एक को चुना। वहाँ माइनस 40 डिग्री सेल्सियस में तैनात रहे। वहाँ 100 किलोमीटर प्रति घंटा से तेज गति से बर्फीली हवाएं चलती हैं।

3 फरवरी 2016 को सियाचिन में काफी बड़ा हिमस्खलन ( Avalanche ) आया। इसमें वह लगभग 35 फीट बर्फ में अपने अन्य नौ साथियों के साथ दब गए। उनके नौ साथी जवान शहीद हो गए परन्तु माँ भारती की कृपा से वीर हनुमनथप्पा जी जीवित रहे। 33 साल के वीर हनुमनथप्पा जी कई दिनों तक बर्फ में दबे रहे। 8 फरवरी शाम 7:30 बजे हनुमनथप्पा जी को सेना द्वारा खोज निकला गया। छ: दिन बाद भी उनके बर्फ से जिन्दा निकलने को चमत्कार समझा गया। सेना द्वारा बाकी नौ जवानों के शव भी ढूंढ लिए गए थे। जब वीर हनुमनथप्पा जी को ढूंढा गया था, तब उनकी हालत काफी खराब थी। उनके शरीर का पानी सूख चूका था। वह बेहोशी की हालत में मिले थे। शुरुआती इलाज के बाद उन्हें दिल्ली के आर्मी हस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी और वह कोमा में थे। 10 फरवरी को उनके ब्रेन में ऑक्सीजन की कमी हो गयी थी।उनके दोनों फेफड़ों में निमोनिया हो गया था। उनके शरीर के कई अंग काम नहीं कर रहे थे। Dehydration के आलावा ठण्ड से hypothermia हो गया था। 11 फरवरी 2016, सुबह 11:45 पर उन्होंने अंतिम साँस ली और इस वीर जवान के प्राणों की ज्योति माँ भारती की रक्षा करते हुए माँ भारती के चरणों में विलीन हो गयी। उनकी मृत्यु multiple organ failure के कारण हुई।




वीर हनुमनथप्पा जी अपनी शहीदी से छ: महीने पहले अपने घर गए थे। 2 फरवरी 2016 को उन्होंने फोन पर अपनी माँ और अपनी धर्म पत्नी महादेवी से भी बात करी थी। वीर हनुमनथप्पा जी की एक प्यारी सी 18 महीने की बच्ची भी है, जिसका नाम है नेत्रा। नेत्रा को तो अभी यह पता भी नहीं की उसके पिताजी को क्या हुआ, परन्तु जब वह बड़ी होगी तो उसे गर्व होगा की उसके पिताजी ने माँ भारती की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। वीर शहीद हनुमनथप्पा जी का अंतिम संस्कार उनके गांव में किया गया था। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों लोग आए और उस वीर बलिदानी हनुमनथप्पा जी के अंतिम दर्शन किए।

जय हिन्द  ———-  भारत माता की जय  ———   जय हिन्द




 

One comment

  • vikas sharma ( ashish)

    es shaheed ki sahadat par mene ek kavita likhi thi or me chahta hu bo kavita enke ghar tak pahuche .

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